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      <title><![CDATA[All articles - msuhelwa.webnode.in]]></title>
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      <language>en</language>
      <pubDate>Sat, 24 May 2014 15:51:00 +0200</pubDate>
      <lastBuildDate>Sat, 24 May 2014 15:51:00 +0200</lastBuildDate>
      <category><![CDATA[News]]></category>
      <category><![CDATA[Places for Visiting]]></category>
      <category><![CDATA[Articals]]></category>
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      <category><![CDATA[Hindi News]]></category>
      <category><![CDATA[English News]]></category>
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         <title><![CDATA[प्यास से व्याकुल हिरन की मौत]]></title>
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         <description><![CDATA[&nbsp;&nbsp;&nbsp;सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के रामपुर रेंज के रामपुर बीट में प्यास बुझाने के लिए जंगल से भटक कर विशुनपुर कला गांव की ओर आए एक हिरन की बाग में मौत हो गई। वन क्षेत्राधिकारी एसपी शुक्ल ने बताया कि यह हिरन जंगल से भटक कर प्यास बुझाने के लिए आबादी की ओर आया था। प्यास से व्याकुल होने के कारण ही हिरन की मौत मौत हो गई है। शव पोस्टमार्टम के लिए गैंसड़ी पशु चिकित्सा केंद्र पर भेजा गया है।
<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sat, 24 May 2014 15:51:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
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         <title><![CDATA[हरे पड़ों की कटान पर नहीं लग रही रोक]]></title>
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         <description><![CDATA[
	हरे पड़ों की कटान पर नहीं लग रही रोक
क्षेत्र में अवैध ढंग से हरे पेड़ों की कटान की जा रही है। जिम्मेदार महकमा के उदासीन बने होने के कारण जंगल के साथ गांवों लगे बाग भी वीरान हो रहे हैं।
सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग का बरहवा व बनकटवा रेंज अवैध कटान को लेकर मशहूर है। मुट्ठी भर कर्मचारियों व जंग लगे रायफलों की बदौलत अवैध कटान पर अंकुश लगा पाना मुश्किल है। अवैध रूप से काटी गई पचास प्रतिशत लकड़ियां ही बरामद होती हैं। जंगल काटने वाले लोग वन विभाग को लाखों रुपये का नुकसान प्रत्येक माह पहुंचा रहे हैं। इसके...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sat, 10 May 2014 16:02:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
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         <title><![CDATA[बेखौफ चल रहा वन माफिया का आरा]]></title>
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         <description><![CDATA[
	बेखौफ चल रहा वन माफिया का आरा
बेखौफ वन माफिया जंगल की इस बेशुमार संपदा को लूट रहे हैं। उदासीन प्रशासन इस पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहा है। यह तस्वीर भंगहा कला गांव के पास के जंगल की है, जहां एक दो नहीं दर्जनों बूट थोड़ी-थोड़ी दूर पर वन सुरक्षा कर्मियों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। वन माफियाओं के लिए गनेशपुर व लौकी बीट इस काम के लिए ज्यादा मुफीद साबित हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो जंगल के आसपास के बसे गांवों में कुछ माफियाओं ने डेरा डाला हुआ है जो मौका मिलते ही अपने साथियों के साथ...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Mon, 21 Apr 2014 16:08:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
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         <title><![CDATA[लौकी बीट के जंगल में लगी आग]]></title>
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         <description><![CDATA[गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी शुरू हो गई है। बरहवा रेंज के लौकीबीट में मंगलवार को आग लगने से बड़े पैमाने पर क्षति हुई है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी मामूली आग लगने की बात कह रहे हैं।
<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Tue, 15 Apr 2014 16:18:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
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         <title><![CDATA[जंगल से सटे गांवों में नेपाली हाथियों का उत्पात]]></title>
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         <description><![CDATA[जंगल से निकलकर नेपाली हाथियों का झुंड फिर आबादी की ओर है। इस बार ग्रामीणों द्वारा हांका लगाने से नाराज हाथियों ने कई लोगों की गेंहू आदि की फसल को रौंद कर नष्ट कर दिया।&nbsp;थाना क्षेत्र के बरहवा रेंज के गनेशपुर, मजगंवा, गनवरिया, दलपतपुर समेत अन्य गांवों में मंगलवार को पहुंचे हाथियों के दल में छोटा बच्चा भी था। बताया जा रहा है कि जब ग्रामीणों ने हांका लगाना शुरू किया तो हाथी भड़क उठे और देखते ही देखते गनवरिया के प्रहलाद यादव व अन्य गांवों के चिनके यादव, फारसी वर्मा, बडकऊ मिश्र आदि की गेंहू की फसल...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Tue, 15 Apr 2014 16:12:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
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      <item>
         <title><![CDATA[आबादी की ओर नेपाली हाथी, दहशत में लोग]]></title>
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         <description><![CDATA[
	आबादी की ओर नेपाली हाथी, दहशत में लोग
जंगल से निकले नेपाली हाथी आबादी की ओर दस्तक देने लगे हैं। इससे संबंधित क्षेत्रों में रह रहे लोगों में दहशत है। सोमवार सुबह से ही हरैय्या की ओर बढ़े दो नेपाली हाथियों की ओर जैसे ही लोगों की नजर पड़ी हड़कंप मच गया। वन विभाग को सूचित कर ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र होकर हांका लगाने लगे। इससे नाराज हाथी सागौन के बगान में घुस गए और छह-सात पेड़ों को तोड़ दिया। इस दौरान एक कुत्ते को भी मार डाला। वन विभाग, पुलिस व एसएसबी की टीम नेपाली हाथियों की घेराबंदी कर उन्हें...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Mon, 03 Mar 2014 16:31:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
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         <title><![CDATA[वीरान हो रहा खरझार नाले से सटा जंगल]]></title>
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         <description><![CDATA[
	वीरान हो रहा खरझार नाले से सटा जंगल
बलरामपुर : वन क्षेत्र के बनकटवा व बरहवा रेंज सीमा में स्थित लैबुड़वा व सर्रा मैनहवा गांव का जंगल वीरान हो गया है। खरझार नाले के पूरब व पश्चिम में लगभग 134 एकड़ में शीशम व खैर के पेड़ धीरे-धीरे काटकर वन माफिया उठा ले जा रहे हैं। यहां लकड़ियों को काटकर डनलप व ट्रैक्टर-ट्राली से प्रतिदिन रात के अंधेरे में निकाला जाता है। इस जंगल में दो माह के अंदर लगभग पांच सौ से अधिक खैर व शीशम के पेड़ों को काट डाला गया है।
वर्तमान समय में खरझार नाले में काटी गई लकड़ियों को छुपाया...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Tue, 21 Jan 2014 14:55:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
      </item>
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         <title><![CDATA[आखिर पकड़ा ही गया आदमखोर तेंदुआ]]></title>
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         <description><![CDATA[आतंक का पर्याय बने तेंदुएं को वन विभाग ने पिंजड़े में कैद किया,&nbsp;सोहेलवा जंगल से सटे कई गाँव में इसका आतंक था,&nbsp;दो बालिकाओं को इसने निवाला बनाया था,&nbsp;अब चले "मियां" लखनऊ के चिड़िया घर में.

	आखिरकार वन विभाग के कड़े मशक्कत के बाद वन कर्मी आदमखोर तेंदुए को पकड़ने में कामयाब हो ही गए।

	&nbsp; सोमवार की रात एक तेंदुआ धोबैनिया नाले के समीप वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजड़े में कुत्ते के शिकार के चक्कर में फंस गया।

	&nbsp;इस तेंदुए का आतंक हरैय्या थाना क्षेत्र के भदवार गांव तथा इसके आस पास के...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Wed, 09 Oct 2013 14:41:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
      </item>
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         <title><![CDATA[जारी है सोहेलवा में पेड़ों की अवैध कटान]]></title>
         <link>http://msuhelwa.webnode.in/news/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a5%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%a7-/</link>
         <description><![CDATA[बलरामपुर) : वन विभाग के तमाम दावे के बाद भी सोहेलवा में पेड़ों की अवैध कटान धड़ल्ले से हो रही है। खासकर सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग का भांभर रेंज इन दिनों अवैध कटान को लेकर चर्चा में है।
भांभर रेंज के अंतर्गत भाथर रेलवे क्रासिंग के पास लगे शीशम के पेड़ों की कटान तो कई बार हुआ। चोर लकड़ी ले जाने में भी सफल रहे। मंगलवार रात को पांच फुट मोटा शीशम का पेड़ का कटान चोरों द्वारा किया जा रहा था। जानकारी होते ही वन दारोगा असदउल्ला रात में ही मौके पर पहुंच गए। वन विभाग की टीम देखकर पेड़ काट रहे लोग भाग गए, लेकिन...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Wed, 09 Oct 2013 14:25:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[तेंदुए के खौफ से जंगलवर्ती गांवों शुरू हुआ पहरा]]></title>
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         <description><![CDATA[बलरामपुर) : वन विभाग की हिदायत के बाद जंगलवर्ती गांवों में ग्रामीणों ने पहरा शुरू कर दिया है। मंगलवार रात्रि ग्रामीणों ने अलग-अलग समूह में गांव की रखवाली की।
बता दें कि महराजगंज तराई थाना क्षेत्र के मैटहवा निवासी पहलवान यादव की 10 वर्षीय बेटी को 27 अगस्त की रात उस समय तेंदुए ने निवाला बना लिया था जब वह हरैय्या थाना क्षेत्र के भदवार गांव अपने ननिहाल गई थी। इसके बाद 16 सितंबर को इसी थाना क्षेत्र के बगधरा गांव निवासी बाबूराम की 10 वर्षीय पुत्री कोइली को घर के सामने से तेंदुए उठा ले गया। दो...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Tue, 08 Oct 2013 14:37:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[देवी पाटन शक्ति पीठ]]></title>
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         <description><![CDATA[यदि आप सुहेलवा घूमने जाते हैं और आप ईश्वर में श्रद्धा रखते हैं तो देवी पाटन शक्ति पीठ आप के लिए सर्वोत्तम स्थान है. ये भारत के प्रमुख शक्ति पीठों &nbsp;में से एक है.
उत्तर-प्रदेश के जनपद बलरामपुर (नेपाल की सीमा से मिला हुआ) की तहसील तुलसीपुर नगर से दो कि.मी. की दूरी पर सिरिया नाले के पूर्वी तट पर स्थित सुप्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी का मंदिर देवी पाठन है, जो देशभर में फैलते 51 शक्तिपीठों में मुख्य स्थान रखता है। यह शिव और सती के प्रेम का प्रतीक स्वरूप है। अपने पिता प्रजापति दक्ष के...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Fri, 05 Jul 2013 15:58:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Places for Visiting]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[तेज घुमावदार गति इनकी सुरक्षा का प्रमुख साधन है]]></title>
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         <description><![CDATA[तेज घुमावदार गति इनकी सुरक्षा का प्रमुख साधन है

	&nbsp;

	
		
	
		इनका वास-क्षेत्र आमतौर पर बंजर पड़ी भूमि या पथरीले पहाड- हैं जहाँ ये अपना भूमिगत माँद बनाते हैं। इन माँदों की खासियत यह होती है कि इनमें एक केन्द्रिय कक्ष और अनेक निकास-द्वार होते हैं। दिनभर ये अपनी माँद में विश्राम करते हैं और शाम होते ही अपने आहार की तलाश में निकल पड़ते हैं। चूहे, जमीनी पक्षी, दीमक आदि इनका मुख्य आहार है। तरबूजा, बेर, खेत में लगे चना-फली आदि भी इन्हें पसन्द है। मादा शिशुओं को जन्म देती है और पालती है। नर...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Fri, 01 Mar 2013 14:59:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[फूँक मारने से बच्चे तन्दुरूस्थ हो जाते हैं!]]></title>
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         <description><![CDATA[दीमक तथा मधु इन्हें विशेष रूप से पसन्द है। दीमक का टीला और वहाँ की जमीन अपने नाखून से खोद कर ये दीमक को हवा के साथ मुँह में खींच लेते हैं। मधु के लिए ये मधु का छत्ता वाले पेड़ों पर चढ़ जाते हैं। इनमें काम-शक्ति बहुत तीव्र एवं गतिमान होती है। इनकी काम-क्रिया घंटो लगातार एवं विद्युतगति से होती है। माऊण्टिंग (Mounting) के ऊपरांत इनकी काम-क्रिया करीब 5 मिनट या अधिक समय तक विद्युतगति से होती है एवं करीब 30 सेकण्ड से 2 मिनट तक के विराम के बाद विना उतरे वही क्रम बार-बार दुहराते है जो घंटो चलता रहता है।...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Mon, 04 Feb 2013 17:16:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[अक्सर ये पानी से निकल कर और मुँह खोलकर धूप सेंकते हैं]]></title>
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         <description><![CDATA[&nbsp;

	
		
	
		&nbsp;
	
		मछली, कछुआ, जल-पक्षी और यहाँ तक कि छोटे हिरण और जंगली सुअर इनके आहार हैं। जाड़े के मौसम में जब तापमान काफी गिरा रहता है तब ये ज्यादा सक्रिय नहीं रहते हैं, आहार भी नहीं लेते हैं और मिट्टी अथवा पत्थरों में माँद बनाकर उसमें निष्क्रिय पड़े रहते हैं। ये मानव-भक्षी नहीं होते परंतु अपना वास–क्षेत्र तथा शिशुओं की सुरक्षा में मनुष्य को भी मार सकते हैं। दलदली मगरमच्छ मीठे जल में रहनेवाले सरीसृप हैं। गर्मी के दिनों में जब नदी-नाले और झील सूख जाते हैं तब ये पानी की तलाश में लम्बी...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Mon, 04 Feb 2013 17:01:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[समागम पूर्व एक से तीन सप्ताह तक लगातार सहवास होता है, बाघो में]]></title>
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         <description><![CDATA[नाम&nbsp;:&nbsp;भारतीय बाघ, रॉयल बंगाल टाइगर
वैज्ञानिक नाम :&nbsp;Panthera tigris tigris
उदभव :&nbsp;बाघ एक एशियाई जानवर है जिसका मूलवास मध्य एवं उत्तरी एशिया रहा है. उत्तरी साइबेरिया में जहाँ अब बाघ नहीं मिलते वहाँ उत्खन्न में दस लाख वर्ष पूर्व के हिमानी काल का बाघ-स्वरुप जानवर का अस्थि-अवशेष मिला है. बाघ की कुल आठ उप-प्रजातियों में से कैस्पियन बाघ (Panthera tigris altaica), जावा बाघ (Panthera tigris sondaica) तथा बाली बाघ (Panthera tigris balica) विलूप्प्त हो चुके हैं और अन्य उप-प्रजातियाँ भी...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Mon, 04 Feb 2013 16:45:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[एलोविरा : औषधि की दुनिया में संजीवनी]]></title>
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         <description><![CDATA[&nbsp;
एलोविरा : औषधि की दुनिया में संजीवनी&nbsp;

एलोविरा भारत में ग्वारपाठा या घृतकुमारी हरी सब्जी के नाम से प्राचीनकाल से जाना जाने वाला काँटेदार पत्तियों वाला पौधा है, जिसमें रोग निवारण के गुण कूट-कूट कर भरे पड़े हैं। आयुर्वेद में इसे घृतकुमारी की 'उपाधि' मिली हुई है तथा महाराजा का स्थान दिया गया है। औषधि की दुनिया में इसे संजीवनी भी कहा जाता है। इसकी 200 जातियाँ होती हैं, परंतु प्रथम 5 ही मानव शरीर के लिए उपयोगी हैं।&nbsp;
&nbsp;इसकी बारना डेंसीस नाम की जाति प्रथम स्थान पर है। इसमें 18...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Thu, 31 Jan 2013 16:15:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[क्या ख़त्म हो जायेगा भारतीय बाघ?]]></title>
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         <description><![CDATA[
	&nbsp;

	धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

	बाघ जंगल का कुशल कूटनीतिक चाणक्य होता है, किन्तु कंकरीट के जंगलों में रहने वाले चाणक्यों की कुटलनीति ने उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिये है इसी कारण दुनिया भर के संरक्षणवादियों व प्रकतिप्रेमियों ने बाघ संरक्षण की मुहिम चलायी जिसे दुनिया की तमाम सरकारों ने मंजूरी दी है। इन सब इंतजामों के बावजूद बाघ का शिकार उसकी खाल व अंगों के लिए जारी है। उन्नीसवीं सदी की शुरूवात में पूरी दुनिया में बाघो की सख्या लगभग 100,000 थी अकेले भारतीय उपमहाद्वीप...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Mon, 29 Oct 2012 15:38:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[पीताम्बर एक अनोखा पुष्प]]></title>
         <link>http://msuhelwa.webnode.in/news/%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%96%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%aa/</link>
         <description><![CDATA[&nbsp;

	
		&nbsp;
	ये है पीताम्बर&nbsp;&nbsp;
	
	एक वनस्पति जो अपने सुन्दर पुष्प के अतिरिक्त&nbsp;तमाम व्याधियों के मूलनाश की क्षमता रखती है ।


	हाँ पीताम्बर एक प्रजाति जिसका पुष्प पीत वर्ण की अलौकिक आभा का प्रादुर्भाव करता है&nbsp; हमारे मध्य, मानों साक्षात गुरूदेव बृहस्पति विराजमान हो इन मुकुट रूपी पुष्पगुच्छों पर, &nbsp; और मधुसूदन स्वयं उपस्थित हो इस छटा &nbsp;में! क्योंकि पीताम्बर कृष्ण का भी&nbsp;एक नाम है, इस पुष्प का पीत वर्ण सहज ही मन को शान्ति, विचारों में सात्विकता और मन में क्षमा...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sat, 27 Oct 2012 15:16:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[मेरे घर भी आई गौरैया]]></title>
         <link>http://msuhelwa.webnode.in/news/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be/</link>
         <description><![CDATA[&nbsp;

	&nbsp;

	&nbsp;

	मेरे घर भी आई गौरैया

	&nbsp;&nbsp;20 मार्च गौरैया दिवस के लिए जब आपका मेल आया तो यही सोच कर उस समय जवाब नहीं दे पाई कि कुछ लिख कर ही भेजूंगी। पिछले वर्ष आपके प्रयास के बाद मैंने भी अपने घर में गौरैया को बुलाने के लिए कुछ प्रयास किए हैं, और अब भी कर रहीं हूं।&nbsp; उस प्रयास को शब्द देना चाहती थी पर फालतू के कार्यों में उलझी रही और यह जरुरी बात लिखने से रह गई।&nbsp;

	
	.... खैर देर से ही सही अपने इस प्रयास से मिली खुशी को मैं आपके साथ बांटना चाहती हूं ....मुझे अपना...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sat, 27 Oct 2012 14:37:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
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         <title><![CDATA[.....कितनी तडफ़ से आई होगी जंगल के राजा को मौत]]></title>
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         <description><![CDATA[
	&nbsp;

	

	
	फोटो- पेंड़ पर लटके शव के सामने खड़े वन-अधिकारी व्&nbsp; कर्मचारी।

	
	
	लखीमपुर। यूं तो वह जंगल का राजा कहलाता है, लेकिन उसकी आखिरत देखकर इंसानों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपने आखिरी समय पर पेंड़ पर फंसकर यह तेंदुआ मदद के लिए कितना तडफ़ा होगा। काश यह गश्ती दल उस रोज भी इधर से गुजर जाता जब अपनी जिंदगी बचाने के लिए इसको किसी की जरूरत थी।
	
	वन महकमे के अफसरों की माने तो दुधवा रिजर्व एरिया के मूर्तिहा वन रेंज में रोहिनी के लगभग १२ फिट ऊंचे पेंड़ पर तेंदुआ चढ़ा होगा, लेकिन...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sun, 14 Oct 2012 15:12:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News On Other Forest]]></category>
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         <title><![CDATA[टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक तेंदुए को मिली मौत]]></title>
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         <description><![CDATA[
	&nbsp;

	

	&nbsp;

	टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक तेंदुए को मिली मौत
	भारत-नेपाल सीमा पर कतरनिया घाट&nbsp; वाइल्ड लाइफ &nbsp;सेंक्चुरी&nbsp; का मामला&nbsp;

	लखीमपुर। दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कतरनिया घाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में एक तेंदुआ का शव पेंड़ पर लटका हुआ मिला है। मूर्तिहा वन रेंज में तेंदुआ का शव रोहिनी के पेंड़ में लटका हुआ था, शव की हालत देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी मौत&nbsp; कई दिन पहले हुई होगी।

	
	मूर्तिहा वन रेंज में शनिवार को फॉरेस्ट गार्ड बब्बन मिश्रा वाचरों के...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sun, 14 Oct 2012 15:10:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News On Other Forest]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[About Suhelwa]]></title>
         <link>http://msuhelwa.webnode.in/news/about-suhelwa/</link>
         <description><![CDATA[&nbsp;
Located in&nbsp;Shravasti,&nbsp;Balrampur&nbsp;and&nbsp;Gonda&nbsp;districts of&nbsp;Uttar Pradesh, Suhelwa Wildlife Sanctuary was declared as a sanctuary in 1988.
Occupying an area of 452 sq km, the sanctuary is covered with saal, sheesham, khair, sagaun (teak), asna, jamun, haldu, phaldu, dhamina, jigna and bahera trees. The fauna found in the sanctuary includes leopard, tiger, bear, cheetah, wildcat, boar and various birds.
Ideal time to visit is from October 15th to March...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Fri, 12 Oct 2012 15:54:00 +0200</pubDate>
         <guid isPermaLink="true">http://msuhelwa.webnode.in/news/about-suhelwa/</guid>
         <category><![CDATA[Places for Visiting]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[दुधवा के गैंडों पर मड़राता खतरा]]></title>
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         <description><![CDATA[
	
		
			
			
		
			लापरवाही की भेंट चढ़ा दुधवा का गैंडा&nbsp;
			-मिथलेश कुमार&nbsp;जयसवाल
		
			
			पलियाकलां-खीरी।&nbsp;दुधवा नेशनल पार्क में चल रही विश्व की एकमात्र अद्रितीय गैंडा पुनर्वास परियोजना के गैंडों का भविष्य सुरक्षित नहीं रह गया है इसका प्रमुख कारण है कि बीते दिवस गैंडा इकाई परिक्षेत्र में मरे गैंडा का शव एवं कंकाल पड़ा रहा उसे वनपशु खाते रहे उसकी भनक पार्क के कर्मचारियों को नहीं लग पाई यह अपने आप में ही विचारणीय प्रश्न है साथ ही गैंडों की मानीयटरिंग किए जाने का दावा भी खोखला साबित...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sun, 30 Sep 2012 16:16:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[News On Other Forest]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[बगुला अब भगत नही रहा !]]></title>
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         <description><![CDATA[
	&nbsp;

	इन्सानों ने या फ़िर प्रकृति? ने बगुला भगत की कहावत को भी झूठा साबित करने की कोशिश की। यहां दो तस्वीरे प्रस्तुत है जो मोहम्मदी जिला खीरी के वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र सतपाल सिंह ने खींची। यह जुवेनाइल कैटल इग्रेट (cattle egret ) है, प्रथम दृष्टया तो यह कौतूहल का विषय बना कि कैटल इग्रेट अपना सफ़ेद रंग छोड़ काले रंग में कैसे प्रगट हो गया। यह आनुवंशिक अनियमितता भी हो सकती है, और किसी मानव की शैतानी भी। अभी इसे लगातार देखा जा रहा है, यदि यह रंग से रंगा गया है तो कुछ महीनों में स्थिति स्पष्ट हो...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Sun, 15 Jul 2012 14:23:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
      <item>
         <title><![CDATA[दुधवा नेशनल पार्क का एक यात्रा संस्मरण]]></title>
         <link>http://msuhelwa.webnode.in/news/%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a7%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8/</link>
         <description><![CDATA[
	&nbsp;

	
		
			
				
					
						
				
				
					
						&nbsp;
				
			
		
		
			तराई के घनों जंगलों में भी खूब दर्शन दे रहे हैं वनराज
		
			&nbsp;
		
			&nbsp;दुधवा नेशनल पार्क के जनक बिली अर्जुन सिंह जिनको शायद कौन नही जानता ? कुछ दिन पहले ही मैंने उनके बारे में पढ़ा तो ऐसा लगा कि बिली अर्जुन सिंह जिन्होने अपना सारा जीवन वन व वन्य जीवों के संरक्षण में समर्पित कर दिया। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला के जंगल के एक हिस्से को संरक्षित क्षेत्र का दर्जा दिलाने का कार्य बिली अर्जुन सिंह ने किया...<br />
सुहेलवा वाइल्डलाइफ की खूबसूरती ]]></description>
         <pubDate>Wed, 29 Feb 2012 16:33:00 +0200</pubDate>
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         <category><![CDATA[Articals]]></category>
      </item>
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